गुड़बाजार बड़ा जैन मंदिर परिचय

अम्बाला में प्राचीन काल में जैन समाज का प्रभाव रहा है जिसके प्रमाण सहित जिला अम्बाला के उपक्षेत्र अम्बाला कैंट में 6 दिगम्बर जैन मंदिर और 1 दिगम्बर जैन चैत्यालय है। लेकिन अम्बाला कैंट के गुड़बाजार में स्थित श्री 1008 दिगम्बर जैन मंदिर जैन समाज के लिये अत्यंत ही उपलक्ष का विषय है। गुड़बाजार में स्थित श्री दिगम्बर जैन मंदिर को बड़ा मंदिर जी कहकर सम्भोदित किया जाता है। बड़ा मंदिर जी सबसे प्राचीन मंदिर है। बताया जाता है की लगभग 180-186 वर्ष पूर्व हरियाणा के ही प्रांत कालका जी के पिंजौर क्षेत्र में खुदाई के दौरान कुछ प्राचीन जैन प्रतिमाएँ प्राप्त हुई थी जिन्हे अम्बाला जैन समाज द्वारा अम्बाला में वर्तमान बड़ा मंदिर जी में विराजमान कराया गया था। ये प्रतिमाएँ चतुर्थकालीन प्रतीत होती है। प्रतिमाओं पर कोई प्रशस्ति व कोई चिन्ह नहीं है अतः यह अनुमान है कि प्रतिमाएँ 1100 वर्ष से भी अधिक प्राचीन है। क्योकि प्रतिमाओं पर कोई चिन्ह नहीं है तो इसलिए कुछ लोग इन प्रतिमाओं को श्री 1008 चन्द्रप्रभु जी की व कुछ लोग श्री 1008 आदिनाथ जी की मानते है। प्रतिमाओं का अतिशय ही है की श्रद्धालुओ की इतनी भावना मंदिर जी को लेके है। आज यह मंदिर एक विशाल रूप ले चुका है जहाँ अन्य वेदियों का भी निर्माण हो चुका है।
कथा अतिशय की
कुछ स्थानीय लोगो द्वारा एक वाक्य बताया जाता है। यहाँ मंदिर जी में नित्य शास्त्र-सभा होती थी जिसमें अम्बाला जैन समाज के लोगो का आगमन होता था। सभा के संचालन का कार्य पंडित श्री मंगल सेन जी (विशारद) करते थे। सभा सांयकाल में होती थी। स्थानीय निवासी बताते है सभा में नित्य एक अज्ञात व्यक्ति का भी आना होता था। सभा में उपस्थित किसी ने भी उससे कभी कुछ नहीं पूछा। यह उन दिनों का वाक्य है जब उजाले के लिए तेल के दीपक ही साधन होते थे। एक बार शास्त्र-सभा चल रही थी और पंडित मंगल सेन जी दीपक में तेल भरना भूल गए थे। तेल समाप्त होने के कारण दीपक धीरे-धीरे बुजने लगा पंडित मंगल सेन जी ने सभा में से किसी को उठकर तेल भरने को कहा तभी वहाँ बैठे उस अज्ञात व्यक्ति ने पीछे बैठे ही हाथ लम्बे करके दीपक में तेल भर दिया। वहाँ उपस्थित सभी लोग यह वाक्य देखकर आश्चर्यचकित एवं भयभीत हो गए। बताते है उस दिन के बाद से उस व्यक्ति का सभा में आगमन नहीं हुआ। लोगो की आस्था है की मंदिर जी में स्थापित प्रतिमाओं के अतिशय के कारण सभा में देवो का भी आगमन होता है तथा वह व्यक्ति भी देव ही था। इसी तरह श्री दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर गुड़बाजार में जैन मुनि महाराज के चातुर्मास के दौरान कई बार केसर की वर्षा भी मंदिर जी में हुई है।
गुड़बाजार बड़ा जैन मंदिर वर्तमान स्थिति

गुड़बाजार के श्री 1008 दिगम्बर जैन मंदिर जी के निर्माण में लगभग 3 कराेड़ रुपए का खर्चा आया। मंदिर जी को बड़े ही प्रेमभाव एवं भक्ति के साथ बनवाया गया है ऐसा देखकर ही प्रतीत होता है। मकराना के खास मार्बल और धौलपुर के लाल पत्थर से तैयार गुड़बाजार के बड़ा जैन मंदिर जी में तीन वेदिया निर्मित हैं। इस परिसर में 2 मंदिर जी है जिनमे से पुराने मंदिर जी को बड़ा मंदिर जी कहते है। यहाँ पर 3 वेदिया स्थापित है और दूसरे मंदिर जी को छोटा मंदिर जी कहते है जहाँ पर 7 वेदिया स्थापित है। गुड़ बाजार के बड़ा मंदिर जी में भव्य हॉल भी बना है। इसमें भगवान की तीन खड़गासन प्रतिमाएं विरजमान हैं। पूरे हाल में जैन समाज से संबंधित भगवान के भावों को पत्थर की नक्काशी से तैयार कर दीवारों पर उकेरा गया है। जिन्हे देखकर मन को अत्यंत शांति एवं भक्ति का अनुभव होता है। गुड़ बाजार के मंदिर में 8 बाई 6 फुट का चांदी का गेट भी बनाया गया है जिसे राजस्थान से तैयार करवाया गया है। चाँदी का यह गेट मंदिर जी की शोभा में चार चाँद लगाता है।
सुविधाएं एवं धर्मशाला
मंदिर जी से थोड़ी दूर सदर बाजार, अम्बाला कैंट, हरगोलाल के पीछे क्रॉस रोड 4 पर श्री दिगम्बर जैन धर्मशाला बनी हुई है जिसमे कुल 16 कमरे ए.सी. के साथ उपलब्ध है। धर्मशाला गुड़बाजार में स्थापित बड़ा जैन मंदिर तथा छोटा जैन मंदिर जी के आधीन आती है। धर्मशाला में दो बड़े हॉल है जो हर प्रकार के शुभ अवसर के लिए उपलब्ध है साथ ही दो कमरे डबल बेड एवं सोफा के साथ उपलब्ध है। धर्मशाला में रिसेप्शनिस्ट की व्यवस्था भी है। धर्मशाला में लिफ्ट की सुविधा भी उपलब्ध है। धर्मशाला में किसी बड़े होटल की तरह ही सुविधांए प्रदान कराई जाती है व साफ सफाई का पूरा ध्यान रखा जाता है। धर्मशाला सभी वर्ग के लोगो के लिए उपलब्ध है। स्थानीय निवासियों के लिए श्री दिगम्बर जैन धर्मशाला एक महत्वपूर्ण साधन है। धर्मशाला के संचालन का कार्य श्री दिगम्बर जैन सभा गुड़बाजार द्वारा किया जाता है।
अम्बाला कैंट जैन समाज व योगदान
अम्बाला कैंट में जैन समाज का जनहित में भी सक्रिय योगदान रहा है इसमें कोई संदेह नहीं है। कई जैन संतों ने समय-समय पर अम्बाला शहर का दौरा किया है। हर साल जैन त्योहारों पर शोभा यात्रा निकाली जाती हैं जिनमें सभी वर्ग के लोग हिस्सा लेते हैं। क्षेत्र में पाँच सौ से भी अधिक दिगम्बर जैन परिवार स्थित है। यहाँ तक कि जैन श्वेताम्बर मूर्ति पूजक संप्रदाय भी अम्बाला में स्थित है। अम्बाला कैंट में मंदिरो को लेकर एक सुंदर व्यवस्था आती है जिसमें क्षेत्र के सभी मंदिरो के संचालन का कार्य श्री दिगम्बर जैन सभा गुड़बाजार द्वारा किया जाता है। जैन समाज ने हर प्रकार के क्षेत्रीय कार्यो में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया एवं स्थानीय समाज के लिए अनेक कार्य किए है जैसे की - क्षेत्र में श्री ऐ०डी० जैन द्वारा लॉर्ड महावीर जैन पब्लिक स्कूल, अम्बाला कैंट का निर्माण सन् 1995 में कराया गया जिसमें 4000 से भी अधिक छात्र पढ़ते है। क्षेत्र में जैन गर्लस सीनियर सेकेंडरी स्कूल स्टाफ रोड, अम्बाला कैंट का निर्माण सन् 1930-1935 के बीच में कराया गया था। क्षेत्र में फिजियोथेरेपी सेंटर भी है जो 20-30 वर्ष पुराना है। जिसका निर्माण जैन समाज द्वारा करवाया गया है।
अम्बाला क्षेत्र के बारे में
अम्बाला को दो उपक्षेत्र में बाटा गया है जिन्हें अम्बाला शहर व अम्बाला छावनीं (कैंट) के नाम से जाना जाता है। अम्बाला हरियाणा व पंजाब की सीमा पर स्थित है। यह भारत की राजधानी दिल्ली से दो सौ किलोमीटर उत्तर की ओर शेरशाह सूरी मार्ग (राष्ट्रीय राजमार्ग नम्बर 1) पर स्थित है। अम्बाला शहर दो नदियों घग्गर ओर टांगरी नदी को अलग करता है। अम्बाला शहर का रेलवे जंक्शन उतर भारत का एक अभिन्न अंग है। अम्बाला शहर को वैज्ञानिक उपकरणो का शहर भी कहा जाता है। अंबाला एक महत्त्वपूर्ण औद्योगिक शहर भी है। वैज्ञानिक उपकरणों, सिलाई मशीनों, मिश्रण यंत्रों (मिक्सर) और मशीनी औज़रों के निर्माण तथा कपास की ओटाई, आटा मिलों व हथकरघा उद्योग की दृष्टि से अंबाला छावनी व शहर, दोनों उल्लेखनीय हैं। अम्बाला नाम की उत्पत्ति शायद महाभारत की अम्बालिका के नाम से हुई होगी। एक अन्य मत यह भी है कि यहाँ पर आमों के बाग बगीचे बहुत थे जिससे इस का नाम अम्बा वाला अर्थात अम्बाला पड़ गया। आज के जमाने में अम्बाला अपने विज्ञान सामग्री उत्पादन व मिक्सी उद्योग के लिए प्रसिद्ध है। अम्बाला को विज्ञान नगरी कह कर भी पुकारा जाता है क्योंकि यहाँ वैज्ञानिक उपकरण उद्योग केंद्रित है। भारत के वैज्ञानिक उपकरणों का लगभग 40 प्रतिशत उत्पादन अम्बाला में ही होता है।
समिति
अम्बाला में बहुत सुन्दर व्यवस्था देखने को सामने आती है। अम्बाला में 6 अलग-अलग स्थानों पर दिगम्बर जैन मंदिर है लेकिन सभी मंदिरो की देखरेख मुख्य रुप से श्री दिगम्बर जैन सभा गुड़बाजार द्वारा किया जाता है। सभी मंदिरो के संचालक अलग है पर सभी संचालक श्री दिगम्बर जैन सभा गुड़बाजार के मेम्बर्स है। समिति के सदस्य इस प्रकार है -
अध्यक्ष - श्री राकेश जैन जी
व्यवसाय - करियाना व्यापारी
कोषाध्यक्ष - श्री कपिल जैन जी
व्यवसाय - करियाना व्यापारी
अन्य मेंबर्स - श्री गौरव जैन जी (सैक्रेटरी), सुनील जैन जी, ललित जैन जी, अरविंदजैन जी, आदेश जैन जी व अन्य