बुड़िया जैन मंदिर परिचय

बुड़िया जैन मंदिर, बुड़िया जैन समाज का इतिहास, विरासत अति प्राचीन है। यह पुराने दिनों की उत्कृष्टता एवं समृद्ध समुदाय का प्रतीक है। सन् 2002 में जब श्री 108 सौरभ सागर महाराज जी बुड़िया पधारे, तब उन्होंने इस मंदिर को अतिशय क्षेत्र के नाम से घोषित किया था। सन् 2004 में भारतीय पुरातत्व विभाग ने मंदिर का सर्वेक्षण करके बताया की यह मंदिर 250-300 वर्ष प्राचीन हैं। मंदिर जी की मूल वेदी भगवान सुपार्श्वनाथ की है। प्रतिमा जी के ऊपर छत्र के रूप में एक नौ मुख वाले सर्प अपने फणों को फैलाये हुए अवस्थित है। इस तरह की अद्वितीय प्रतिमा विरला ही है। यह प्रतिमा 600 वर्षो से भी अधिक प्राचीन है। मूल वेदी की बायीं ओर भगवान चन्द्रप्रभु जी की वेदी है और दाईं और चौबीसी वेदी है। विक्रम सम्वत के अनुसार दोनों वेदियों पर 600 वर्ष प्राचीन अनेक जैन प्रतिमाएँ विराजमान है। अगर हम वीर सम्वत के अनुसार तिथियों को 1548 के रूप में अंकित करते है, जो जैन वर्ष पञ्जी से संबंधित प्रतिमा लगभग 1000 वर्ष पुरानी होगी। कुछ अष्टधातु की प्रतिमाएँ प्रयोगात्मक रूप से लगभग 1000 वर्षो से भी अधिक प्राचीन है। किन्तु दुर्भाग्य है कि एक अँधेरी रात में सन् 2013 में उन प्रतिमाओं की चोरी हो गई थी। पुलिस की टीम द्वारा गहरी छानबीन के बाद भी कोई सुराग नहीं मिला।

मंदिर जी के गर्भगृह के साथ ही एक विशाल सभा कक्ष भी है। सन् 2007-08 में भारत सरकार की वित्तीय सहायता से इसका नवीनीकरण किया गया। सभागृह की बायीं और पद्मावती माता जी की वेदी विराजमान है। पद्मावती माता की प्रतिमा भी प्राचीन है। यह प्रतिमा स्थानीय एवं बाहरी लोगो के लिए श्रद्धेय एवं चमत्कारी है। प्रत्येक शुक्रवार माता जी को चोला, श्रृंगार तथा आभूषणों से सजाने के दिवस के रूप में मनाया जाता है।
बुड़िया जैन समाज
बुड़िया गाँव और बुड़िया जैन मंदिर का इतिहास, विरासत अति प्राचीन है। यह पुराने दिनों समृद्ध समुदाय का ऐतिह्य एवं गौरवमय अतीत का बखान करते है। वर्तमान बुड़िया जैन समाज 12-15 परिवारों में सिमटकर रह गया है। किन्तु यह छोटी संख्या होने पर भी किसी भी 'विधान' व पूजन, दसलक्षण पर्व, साधु भक्ति एवं अथिति-संतो के सत्कार के लिए एक साथ कंधे से कन्धा मिलाकर एक जुट होकर सदा खड़े रहते है। मुनि महाराज जैसे- श्री 108 सौरभ सागर महाराज जी, श्री 108 नयनसागर महाराज जी, श्री 108 विद्याभूषण सन्मति सागर महाराज जी ने समय-समय पर बुड़िया पधार कर सभी को प्रेरित एवं धार्मिक भावना, समर्पण भावना, सेवा भावना को जागृत किया तथा उत्साहवर्धन किया और लोगो की प्रशंसा की।
एक बार सन् 2004 में श्री 108 गुप्ति सागर महाराज जी बुड़िया में पधारे तब उन्होंने कुछ पड़े हुए शास्त्रों को जाना और बताया की ये 2000 से 2500 वर्ष पुराने है। समाज के लोगो को इन शास्त्रों को सम्यक ज्ञान न होने से उन शास्त्रो की अच्छी देखभाल के लिए उचित संरक्षण के लिए गुप्ति धाम दिगम्बर जैन मंदिर भेज दिया गया। अब यहाँ के भक्त कर्तव्यनिष्ठ लोगो ने अपने प्राचीन ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देने का सर्वदा सफल प्रयास करते है। कभी पुर्ननिर्माण, कभी नवीनीकरण तथा विस्तृत कर योजनाबद्ध पद्धति से रखरखाव करने के लिए तत्पर रहते है।
बुड़िया का इतिहास
जिला यमुनानगर के पूर्वी भाग एवं यमुना नहर के किनारे बसा हुआ बुड़िया अति प्राचीन समृद्ध गाँव है। यह यमुनानगर रेलवे स्टेशन से नौ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह ऐतिहासिक गाँव अपने भीतर पुरानी सभ्यता, संस्कृति एवं प्राचीन धरोहर को अपने में सुरक्षित रख कर निश्चल है। इस गाँव में स्थित एक प्राचीन किला, बौद्धस्तूप, जैन मंदिर अपने समृद्धशाली अतीत को उजागर करता है। यहाँ राजा हर्षवर्धन का शासन था। यहाँ से एक किलोमीटर के दायरे में सुघ ( श्रुघ्ना ) गाँव प्राचीन शहरों में से एक था। मौर्य सम्राट अशोक के शासन काल में बौद्धधर्म विकास चरमसीमा पर था एवं यह स्थान बौद्धधर्म का महत्वपूर्ण केंद्र था। सन् 2008 में भारतीय पुरातात्विक को उत्खनन से बुड़िया से एक किलोमीटर पश्चिमोतर चनेटी गाँव में एक बौद्ध स्तूप का पता चला था, जिसे 2000 से 2500 वर्ष पुराना बताया जाता है। उसी समृद्वि के दिनों में चीनी बौद्ध विद्वान ह्वेन त्सांग शैक्षणिक भ्रमण के लिए आया था। यह क़स्बा मुग़ल सम्राट अकबर के मुख्य परामर्शदाता बीरबल का जन्मस्थान है।
बुड़िया जैन धर्मशाला
बुड़िया जैन धर्मशाला स्थानीय जनता के लिए एक महत्वपूर्ण परिसर है। यह धर्मशाला, मुनि, साधुओं के प्रवास, प्रवचन, धार्मिक कार्यक्रम तथा विवाह आदि सामाजिक एवं धार्मिक कार्यो के लिए उपयोग की जाती है। इससे विशेषकर धर्मशाला के संरक्षण हेतु स्थाई आय का स्त्रोत के रूप में सहायता मिलती है। धर्मशाला में पुराने भवन की दीवारे मिट्ठी की थी, जो समय के साथ-साथ नष्ट हो गयी थी। अतएव सन् 2017 में श्री घनश्याम दास अरोड़ा, विधायक, यमुनानगर के संरक्षण में बुड़िया जैन समाज की समिति ने निर्माण कार्य शुरू किया। नव-निर्मित परिसर को एक बड़े सभाकक्ष तथा कुछ कमरों से सुसज्जित किया गया।
समिति
बुड़िया जैन मंदिर ने 'श्री दिगंबर जैन सभा' रज़ि. संख्या - HR/003/2017/00843, के नाम से एक समिति का पंजीकरण किया है एवं सात सदस्यों वाले एक मंडल का गठन किया है। समिति में कार्यरत निम्नलिखित सदस्यगण :


श्री गौतम जैन
सचिव

श्री अतुल जैन
कोषाध्यक्ष

श्री अंकित जैन
सदस्य

श्री सुशील जैन
सदस्य

श्री अनिल जैन
सदस्य
